Chapter—01
प्रकाश (Light)
प्रकाश एक प्रकार की उर्जा है जिसकी वजह से हमें वस्तुएं दिखाई देती हैं। जबकि
प्रकाश खुद अदृश्य रहता है।
प्रकाश के गुण(Properties of Light)
1-
निर्वात में प्रकाश की चाल 3 X 10⁸ मीटर/सेकेंड
होती है।
2-
दृश्य प्रकाश की तरंग दैर्ध्य 3900 Å से 7800 Å तक होती है।
3-
प्रकाश विद्दयुत तरंगो के रूप में सीधी रेखा में चलता है।
4-
प्रकाश के कारण वस्तुएं हमे दिखाई देती है, लेकिन प्रकाश स्वयं हमें दिखाई नहीं देता है।
5-
प्रकाश जब किसी तल से टकराता है तो उसका परावर्तन हो जाता है।
6-
प्रकाश पारदर्शी माध्यमों में गमन करता है।
7-
जब प्रकाश एक मध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है तो
उसका अपवर्तन हो जाता है।
नोट- जो वस्तुयें प्रकाश उत्पन्न करती हैं, उन्हें प्रदीप्त(Luminous)
वस्तुयें कहते हैं।
जैसे- सूर्य, मोमबत्त्ती ,
बल्ब etc.
तथा जो वस्तुयें प्रकाश
उत्पन्न नहीं करती हैं, उन्हें अप्रदिप्त(Non-Luminous)
वस्तुयें कहते हैं।
जैसे- चंद्रमा , किताब ,
कलम etc.
प्रतिबम्ब (Image)–
दर्पण में बनने वाले वस्तु की आकृति को
प्रतिबम्ब कहते हैं |
प्रतिबम्ब दो प्रकार का होता है –
1.
वास्तविक प्रतिबम्ब
इसको परदे पर प्राप्त किया जा सकता है। यदि
किसी बिंदु से चलने वालीं प्रकाश की किरणें दर्पण से परावर्तित होने के पश्चात्
किसी दुसरे बिंदु पर वास्तव में मिलतीं हों, तो बनने वाला प्रतिबिम्ब वास्तविक
होगा।
2.
आभासी
प्रतिबिम्ब
इसको परदे पर प्राप्त नहीं कर सकते हैं, इसका
फोटो लिया जा सकता है। यदि किसी वस्तु से चलने वालीं प्रकाश की किरणें दर्पण से
परावर्तित होने के पश्चात् किसी दुसरे बिंदु पर वास्तव में नहीं मिलती हों, बल्कि
मिलती हुई प्रतीत होती हों तब बनने वाला प्रतिबिम्ब आभासी होगा।
प्रकाश
का परावर्तन (Reflection of Light)-
प्रकाश का किसी चिकने तल से टकराकर वापस अपने
मार्ग पर लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। जिस तल पर प्रकाश का
परावर्तन होता है, उसे परावर्तक तल कहते हैं।
प्रकाश के
परावर्तन का नियम(Laws of Reflection) –
प्रकाश के परावर्तन का दो
मुख्य नियम है :-
1.
आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।
2.
आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है।
गोलीय दर्पण (Spherical Mirror)-
किसी कांच के खोखले गोले के कटे हुए भाग को गोलीय दर्पण कहते हैं जिसके एक ओर पॉलिश
की गई हो। यह दो प्रकार के होते हैं।
1.
अवतल दर्पण (Concave Mirror)
वे गोलीय दर्पण जिसके
उभरे हुए तल पर पॉलिश की जाती है तथा
दबा हुआ तल परावर्तक तल होता
है, अवतल दर्पण कहलाता है।
2. उत्तल दर्पण (Convex Mirror)
वे गोलीय दर्पण जिसके दबे
हुए तल पर पॉलिश की जाती है तथा उभरा
हुआ तल प्रवर्तक तल होता है, उत्तल दर्पण कहलाता है।
गोलीय दर्पण से सम्बंधित परिभाषाएं (Definition related to
Spherical Mirror)
1.
दर्पण का ध्रुव
गोलीय दर्पण के
परावर्तक तल के मध्य बिंदु को दर्पण का ध्रुव कहते हैं, इसको P से प्रदर्शित करते हैं।
2.
वक्रता केंद्र
गोलीय दर्पण जिस
खोखले गोले का कटा हुआ भाग होता है, उसके केंद्र को उस दर्पण का वक्रता केंद्र
कहते हैं। इसको C से प्रदर्शित करते हैं।
3.
वक्रता त्रिज्या
वक्रता केंद्र से
ध्रुव तक की दूरी वक्रता त्रिज्या कहलाती है। इसको r से प्रदर्शित करते हैं।
4.
मुख्य अक्ष
वक्रता केंद्र को
ध्रुव से मिलाने वाली रेखा, मुख्य अक्ष कहलाती है।
5.
फोकस
प्रकाश की किरणें
गोलीय दर्पण से परावर्तित होने के बाद मुख्य अक्ष पर स्थित जिस बिंदु से होकर जाती
हैं, उसे फोकस या मुख्य फोकस कहते हैं। इसको F से प्रदर्शित करते हैं।
6. फोकस दूरी
गोलीय दर्पण के
ध्रुव से फोकस तक की दूरी फोकस दूरी कहलाती है इसको f से प्रदर्शित करते हैं।
गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या तथा फोकस दुरी में संबंध (Relation Between
Radious of Curvature and Focal Length)
गोलीय दर्पण की फोकस दूरी उसकी वक्रता
त्रिज्या की आधी होती है।
गोलीय दर्पण से
प्रतिबिंब बनने के नियम—
1.
मुख्य अक्ष के समांतर
चलने वाली प्रकाश की किरण, अवतल दर्पण के फोकस बिंदु से होकर गुजरती है तथा उत्तल
दर्पण के फोकस से आती हुई प्रतीत होती है।
2.
फोकस बिंदु से जाने वाली
प्रकाश की किरण अवतल दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है।
3.
दर्पण के वक्रता केंद्र
से होकर जाने वाली प्रकाश की किरण दर्पण से परावर्तन के बाद उसी मार्ग पर वापस लौट
आती है।
प्रतिबिंब तथा फोकस बिंदु की परिभाषा —
गोलीय दर्पण की मुख्य अक्ष के समांतर चलने वाली प्रकाश की किरणे दर्पण से
परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर वास्तव में आकर मिलती है या उस बिंदु से आती हुई
प्रतीत होती हैं, वह बिंदु ही दर्पण का फोकस बिंदु या वस्तु का प्रतिबिंब कहलाता
है।
नोट: वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंब— यदि प्रकाश की
किरणे परावर्तन के बाद किसी बिंदु पर वास्तव में मिलती हैं तो प्रतिबिंब वास्तविक
होता है। और यदि प्रकाश की किरणे उस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं तो
प्रतिबिंब आभासी होता है।


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