विधुत विभव (Electric Potential)––
विधुत विभव से पहले हमे विधुत आवेश को समझना बहुत जरूरी है जिसके बारे में हमने पहले एक पोस्ट डाल रखी है जहां हमने हमने पढ़ा की कसी भी परमाणु मैं electrons पर आवेश होता है जो परमाणु के अंदर स्थिर होता है तथा जो मुक्त electrons होते हैं वह गतिशील रहते हैं परंतु उनकी गति की कोई एक निश्चित दिशा नहीं होती है| परमाणु के अंदर free electrons zig-zag गति करते रहते हैं | जिससे इलेक्ट्रान के बीच टक्कर के कारण स्थिरता बनी रहती है |
विधुत विभव वह भौतिक राशि है जो वस्तुओं के अंदर उपस्थित आवेश को प्रवाहित होने के लिए एक निश्चित दिशा निर्धारित करती है | जिसके लिए विधुत क्षेत्र के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है|
विधुत क्षेत्र में किसी एकांक आवेश को अनंत से किसी
बिन्दु तक लाने में क्षेत्र के विरुद्ध किया गया कार्य, विधुत विभव कहलाता
है | इसे V से
दर्शाया जाता है तथा इसका मात्रक जूल/कूलॉम या वोल्ट होता है |
माना किसी परीक्षण आवेश q० को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में विधुत क्षेत्र के विरुद्ध W कार्य करना पड़ता है तो विधुत विभव
V = W/q० volt
विधुत क्षेत्र में किसी एकांक धन आवेश को अनंत से किसी बिन्दु तक लाने में किए गए कार्यW तथा परीक्षण धन आवेश q० के अनुपात को विधुत विभव कहा जाता है|
विभवांतर( Potential Difference—
विधुत क्षेत्र में किसी एकांक धन आवेश को किसी एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक लाने में विधुत क्षेत्र के विरुद्ध किए गए कार्य को उन दोनों बिंदुओं के बीच विभवांतर कहते हैं।
माना किसी विधुत क्षेत्र में उपस्थित एक परीक्षण आवेश q० को किसी एक बिन्दुA से किसी दूसरे बिन्दु B तक विस्थापित करने में WAB कार्य करना पड़ता है तो बिन्दु B तथा बिन्दु A के मध्य विभवांतर
VB – VA = WAB/q० वोल्ट
होगा|
इस प्रकर हम कह सकते हैं की विधुत आवेश एक एसी राशि है
जिसमें स्वयं के कारण विधुत क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं हो सकता इसमे परिवर्त लाने
के लिए विधुत बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है जिसे विधुत विभव का नाम दिया गया |
इलेक्ट्रॉन-वोल्ट(Electron-Volt)––
विधुत क्षेत्र में किसी एक electron को
एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में जो कार्य करना पड़ता है, उस कार्य को 1Electron-Volt
कहा जाता है| जबकि उन दोनों बिंदुओं
के मध्य विभवान्तर 1 वोल्ट हो |
यदि A व
B दो बिंदुओं के मध्य विभवांतर VA- VB हो तो परीक्षण आवेश पहले बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक विस्थापित
करने में किया गया कार्य, विभवांतर की परिभाषा के अनुसार, –––
VB – VA = WAB/q० वोल्ट
W = q० (VB – VA )
यदि VB – VA = 1 वोल्ट हो तथा
W = 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट होगा | अत: 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट = 1.6×10-19 जूलविधुत विभव की विमा(Dimensional
Formula of Electric Potential)–– विधुत विभव का
बिन्दु आवेश के कारण विधुत विभव–––
माना किसी बिन्दु O पर कोई +q आवेश स्थित है जिसके कारण उत्पन्न विधुत क्षेत्र में O से r मीटर की दूरी पर एक बिन्दु P स्थित है जिस पर हमें विधुत विभव की गणना करनी है | माना आवेश +q से x मीटर दूर दो बिन्दु AB एक दुसरे से अल्प दूरी dx पर स्थित हैं जहां पार एक परीक्षण धन आवेश q0 को रखा गया है |
q0 को अनंत से बिन्दु A तक विस्थापित करने में किया गया कार्य W = बलF ×
विस्थापनd x 
यदि आवेश negative होगा तो विभव का मान भी negative ही होगा|
उपरोक्त सूत्र से स्पष्ट है की विधुत विभव आवेश से
दूरी के व्युत्क्रमनुपाती होता है | अत:
दूरी बढ़ने का साथ साथ विभव का मान घटता जाता है |
विभव प्रवणता—
आवेश से दूरी पारिवर्तन के साथ विभव परिवर्तन की दर
को विभव प्रवणता कहते हैं इसे dV/dr से व्यक्त किया जाता है |
समविभव पृष्ठ(Equipotential
Surface)––
समविभव पृष्ठ एक एस पृष्ठ होता है जिसके सभी बिंदुओं
पर विधुत विभव का मान एकसमान होता है |
निम्न तथ्यों पर ध्यान दीजिए ––––
1 समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विभव समान होने
के कारण इसके किन्ही दो बिंदुआओं के बीच विभवान्तर शून्य होता है|
2 शून्य विभवान्तर होने के कारण इस पृष्ठ मे कसी आवेश
को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में किया गया कार्य भी शून्य होता है|
3 आवेश को विस्थापित करने में किया गया कार्य शून्य
तभी हो सकता है जन विधुत क्षेत्र आवेश के लम्बवत हो , अत: विधुत क्षेत्र समविभव
पृष्ठ के लम्बवत होता है |
4 दो समविभव पृष्ठ एक दूसरे को काट नहीं सकते |







0 Comments