विधुत क्षेत्र को समझने के लिए हमे पहले विधुत आवेश को समझना पड़ेगा यदि आप ने विधुत आवेश के बारे मे नहीं जाना है तो आप हमारी पोस्ट Click here पर जाकर विधुत आवेश के बारे में पढ़ लीजिए |
विधुत क्षेत्र किसी आवेश के चारों और का वह क्षेत्र होता है जिसमें रखा हुआ कोई दूसरा परीक्षण आवेश आकर्षण या प्रतिकर्षण के बल का अनुभव करता है |
निम्न बिंदुओं पर भी ध्यान दीजिए–––––––
1 . जिस विधुत क्षेत्र में रखा हुआ परीक्षण आवेश समान विद्धुत बल का अनुभव करता है, समरूपी विधुत क्षेत्र कहलाता है|
2. एसा विद्धुत छेत्र जिसके अलग अलग बिन्दुओं पर परीक्षण आवेश द्वारा अनुभव किए गए विद्धुत बल का मान भिन्न भिन्न होता है असमरूपी विधुत क्षेत्र कहलाता है|
3. यदि विद्धुत छेत्र का मान समय के साथ परिवर्तित होता रहता है तो इस प्रकार के विद्धुत छेत्र के को परिवर्ती विधुत क्षेत्र कहते हैं |
4. यदि विधुत क्षेत्र का मान सभी बिन्दुओ पर नियत रहता है तो एसे विधुत क्षेत्र को अपरिवर्ती विधुत क्षेत्र कहते हैं |
विद्धुत बल रेखाएं(Electric Lines of Force)–––––
विधुत क्षेत्र को दर्शाने के लिए फैराडे ने विधुत बल रेखाओं को समझाया | विद्धुत बल रेखा विधुत क्षेत्र में खीचा गया काल्पनिक वक्र होती है जिसपर एक स्वतंत्र एकांक धनावेश चल सकता है |अत: विधुत क्षेत्र को विद्धुत बल रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है |
विधुत क्षेत्र की तीव्रता इन्ही बल रेखाओं की संख्या के अनुक्रमनुपाती होती है |अत: जिस बिन्दु पर विद्धुत बल रेखाओं की संख्या अधिक होती है वहाँ विधुत क्षेत्र की अधिक होती है तथा जहां विद्धुत बल रेखाओं की संख्या कम होती है वहाँ विधुत क्षेत्र की तीव्रता कम होती है|
विधुत बल रेखाओं से संबंधित निम्न तथ्यों को समझिए ––––––
1. विद्धुत बल रेखाएं धनात्मक आवेश से निकलना प्रारंभ होती तथा ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती है |
2. विद्धुत बल रेखाएं धनात्मक आवेश से निकलना प्रारंभ होती तथा ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती है परंतु ये बंद लूप कभी नहीं बनती है |
3. किसी भी विद्धुत बल रेखा के किसी एक बिंदु पर खीची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर परिणामी विद्धुत छेत्र की तीव्रता को प्रदर्शित करती है |
4. दो बल रेखाएं परस्पर एकदूसरे को कभी नहीं काट सकती |
5. दो समान धनात्मक आवेशों के लिए विद्धुत बल रेखाएं आवेशों को मिलाने वाली रेखा के पारित: घूर्णन सममितता रखती हैं |










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Thanks
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